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फोकट की इस दौड़ में

फोकट की इस दौड़ में फोकट की इस दौड़ में फोकट की इस दौड़ में दौड़ रहे सब नेता आगे आगे वोटर भागे पीछे पीछे नेता कोई बैंक के लोन को फोकट में करे चुकता दो रुपये चांवल दे के कोई बन जाते दाता कोई भूमि दे फोकट में कोई मकान दे जाता कोई देता खाना खाने कोई शौचालय देता पैदा होने पर पैसा देता मरने पर भी देता फोकट खाने वालों से लेकिन कोई कुछ ना लेता कोई देता स्कूटी तो कोई साइकिल देता तलाक होने पर जॉब में रखे शादी में धन देता कोई पानी देता तो कोई बिजली देता वोट के खातिर लूट रहे देश को अपने नेता होड़ मची देने में अब तो कौनसा बाप का जाता हाथ राज पाने के खातिर सब कुछ नेता देता अर्थव्यवस्था की बारह बजी है काम नही कोई करता फोकट का फिर ज्ञानचंद वो ज्ञान जगत को देता पंकज कुमार झा चित्तौड़गढ़
चिंतन राष्ट्रीय परिदृश्य पर भारतीय जनता पार्टी का राज्यों में से घटता हुआ प्रभाव पार्टी के लिए जरूर एक सोचने का विषय होना चाहिए।जैसा कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का चेहरा नरेंद्र भाई मोदी और अमित भाई शाह जैसे दिग्गज जिन्होंने जनता के बीच में अपनी एक छवि बनाई है।पार्टी के विचारों को लेकर के उसका समर्थन लगातार बढ़ रहा है ।अर्थात 2014 के लोकसभा चुनाव में संपूर्ण देश में भारतीय जनता पार्टी ने अपने दम पर जितनी सीटें जीती 2019 में वह दम कामयाबी के साथ रिपीट हुआ। लेकिन जहां तक राज्यों की बात करें इन्हीं 6 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी के हाथों से कई राज्य  खिसकते चले गए जिनमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और अब झारखंड। यह सब के लिए सोचने का विषय है कि आखिर पार्टी का इतना लोकप्रिय चेहरा मोदी जी के रूप में पार्टी के साथ है फिर भी पार्टी राज्यों में क्यों पिछड़ रही है वही लोग जो 50% वोटों के साथ मोदी जी को सर्वाधिक सीटें देते हैं वही लोग राज्य चुनाव में भाजपा को पीछे छोड़ देते हैं। अर्थ साफ है केंद्र सरकार के कामों से लोग संतुष्ट हैं। केंद्र सरकार अपनी समस्त योजनाओं का प्रचा...

क्या हुआ है मुल्क में

बदले बदले लोग हैं बदली बदली है हवा क्या हुआ है मुल्क में जो आ रहा है धुँवा कौन है तेरे यहाँ कौन है मेरे यहाँ छिड़के है बारूद जो और कर रहा धुँवा धुँवा कितना अमन चैन था कितना वो सुकून था क्या हुआ है इस कदर क्यों उठ रहा धुँवा धुँवा हरा भरा था वन मेरा चल गई गरम हवा भिड़ रही है लकड़ियां उठ रहा धुँवा धुँवा पेड़ सब जले हुए गर्म हो गयी हवा जानवर है जल गए मानवता बची कहाँ देश को फिर तोड़ने आ रहे है कुछ युवा आओ हम पहचान ले दे दे उनको फिर दवा कल भी तुम मौन थे देश तुमने गवां दिया आज फिर जो ना जगे रह जायेगी सिसकियां पंकज कुमार झा चित्तौड़गढ़ मोबाईल 9314121539 कविता पर अपनी टिप्पणी अवश्य करें।

हम अब तो बोलेंगे

गीत (नारी जागृति/ सशक्तिकरण) हम अब तो बोलेंगे बहुत हो चुका मौन रहे हम अब तो बोलेंगे अपनी शक्ति दिखला दी तो सब फिर डोलेंगे नही सहेंगे कुछ भी ऐसा जिसमें मान घटे अपने अधिकारों के खातिर हम तो बोलेंगे अब तक जिसने भी चाहा उसने कुचल दिया खुशबू वाला फूल समझ कर तोड़ा फेंक दिया द्रौपदी वाला चीर हरण हम अब ना झेलेंगे बन रणचंडी असुरों की छाती पर डोलेंगे जो भी हमारी ओर बढ़ेंगे उन दुष्टों को काटेंगे दुर्गा का हम रूप धरेंगे शत्रु धूल को चाटेंगे नही जाएंगे न्याय मांगने जग के आगे हम माधव का हम लेकर सुदर्शन खुद ही लड़ लेंगे पंकज कुमार झा चित्तौड़गढ़ मोबाईल 9314121539 कविता पर अपनी अनमोल टिप्पणी अवश्य करें।

Prayer- O Mighty God

Prayer-  O Mighty God O Mighty God you know What is in my heart and soul Why are you examine me when you know What is in your heart and soul I don't need money or gold I don't need any boon from you I only need your blessings With it I can live in forest too I never forget your worship I never forget your prayer My heart never engage In the dirty system of this world My dawn comes with your prayer My night comes with your prayer May be it summer or winter or rainy But I pray you with my soul O Mighty God I serve only you Never need the world in life You always be in my heart You never forget you poor son. Pankaj Kumar Jha Chittorgarh Mobile-9314121539

आध्यात्मिक गीत

आध्यात्मिक गीत जिस मोड़ पे आकर उलझू मैं उस मोड़ पे प्रभु तुम मिल जाना जब आये समझ ना कुछ भी मुझे उस बेर तूँ मुझे समझा जाना तूँ जानता है हर दिल की व्यथा फिर तुझे सुनाऊँ में किसकी कथा प्रभु तूँ तो, प्रभु तूँ तो अंतर्यामी है तूँ जग का एक ही स्वामी है तूँ  ही एक सत्य है इस जग का बाकी सब मिथ्या बेमानी है हर विपदा का तूँ समाधान तूँ दरियादिल तूँ कृपानिधान कोनहारे के भीषण दंगल में गज को तूने जीवनदान दिया परीक्षित को तूने बचाया था गुरु पुत्र ने तीर चलाया था पढ़ते थे तुम जब भी माधव सांदीपनी ने गुरु ज्ञान दिया गुरु दक्षिणा मां के मांगने पर गुरुपुत्र को दूसरा प्राण दिया पंकज कुमार झा प्रान्त महामंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद चित्तौड़गढ़ 9314121539 गीत की कोई पंक्ति या भाव आपको अच्छा लगे तो टिप्पणी जरूर करें।

तुम पूजो चाहे गांधी को

  तुम पूजो चाहे गांधी को तुम पूजो चाहे गांधी को चाहे जिसकी मर्जी हो लेकिन थोप नहीं तुम सकते चाहे जितनी मर्ज़ी हो माना गांधी आंधी था वो आज़ादी के प्यारों का बैर रखा था उसने फिर क्यों मां के प्यारे दुलारों का वीर सावरकर तुम को नही भाये नहीं भाये आज़ाद कभी लाला बाल पाल नही भाये नही भाये सुभाष कभी भगत सिंह ने बम था फोड़ा नही उसी से कोई मरा जब दी थी अग्रेज ने फांसी गांधी फिर क्यों नही अड़ा पहले तुम्हें थी चाहत हिंदी हिंदी में तुमने बात किया कोंग्रेस नाम था अंग्रेजों का स्वराज  क्यों नही आत्मसात किया। हिंदी हित की बात तुम करते फिर हिंदुस्तानी पर काहे अड़े टोपी से तुम्हे डर क्यों लगता हम भी तो थे तेरे साथ खड़े बापू तुम अच्छे थे तुमने स्वच्छता की बात करी लेकिन खिलाफत करके तूने तुष्टिकरण शुरुआत करी तूने बोला नहीं बंटेगा बटेगा मेरी लाशों पर क्यों फैसला बदला तुमने नेहरू के जज़्बातों पर चलो विभाजन टल नहीं सकता इसीलिए तुमने बांट दिए दे के टोपी को उसका हिस्सा चोटी को क्यों भूल गए। माना उन जहरीले सांपों से मेरी माँ को खतरा था दस को बाहर कर के तुम फि...